हमीरपुर को नगर निगम का दर्जा तो मिल गया, लेकिन क्या यह सिर्फ कागजी घोषणा भर है? निगम के अधिकारियों की गैर-मौजूदगी और लापरवाही ने शहर की स्थिति को चरमरा दिया है। नालियां गंदगी से अटी पड़ी हैं, सड़कों पर सीवरेज का पानी और कचरा बिखरा हुआ है, और बदबू ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है।
*बस स्टैंड के सामने गंदगी का अंबार*
बस स्टैंड के ठीक सामने नालियों का कचरा और गंदा पानी सड़कों पर फैला हुआ है, जिससे दुकानदारों और आम नागरिकों को भारी परेशानी हो रही है। लोगों का आरोप है कि पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष अजमेर सिंह ठाकुर के जाने के बाद से हमीरपुर की दशा दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही है।
*सब्जी मंडी का हाल: गंदे पानी से लबालब सड़कें*
सब्जी मंडी के रास्ते पर शिविराज का गंदा पानी सड़कों पर बह रहा है, लेकिन अधिकारियों की आंखें मूंदी हुई हैं। यह मुख्यमंत्री का गृह जिला है, फिर भी प्रशासनिक मौन साधे बैठा है। क्या यही है ‘सुशासन’ की मिसाल?
*बस स्टैंड के पास नशेड़ियों का अड्डा*
बैंड शॉपिंग कॉम्प्लेक्स अब नशेड़ियों का अड्डा बन चुका है। आए दिन शराब की खाली बोतलें यहां बिखरी मिलती हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई कार्रवाई नहीं हो रही। क्या नगर निगम सिर्फ फाइलों तक सीमित है?
जनता सवाल पूछ रही है: कब जागेंगे अधिकारी? कब सुधरेगा हमीरपुर? अब बस हो चुका है, अब तो साफ-सफाई और व्यवस्था का ठोस कदम उम्मीद है!
