पवन धीमान, हमीरपुर
निर्माणाधीन राष्ट्रीय राजमार्ग-03 (NH-03) की अधूरी सड़क और जल निकासी व्यवस्था ने स्थानीय निवासियों की चिंता बढ़ा दी है। बरसात के मौसम में उन्हें डर सता रहा है कि कहीं उनके घरों में पानी न घुस जाए या छतें न गिर जाएँ। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कंपनी और प्रशासनिक अधिकारी उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं, जिससे उनका जीवन दूभर हो गया है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि उन्होंने अपनी जीवनभर की कमाई लगाकर घर बनाए थे, लेकिन अधूरे निर्माण कार्य और खराब जल निकासी के कारण उनके घरों को नुकसान का खतरा मंडरा रहा है। एक रिटायर्ड फौजी ने बताया, “हम जिला कलेक्टर के पास शिकायत लेकर गए, लेकिन अधिकारियों ने सिर्फ कंपनी को फोन कर दिया। कंपनी के अधिकारी हर बार बहानेबाजी करते हैं—कभी शिमला का बहाना, कभी मीटिंग का।”
ग्रामीणों के अनुसार, सड़क निर्माण के दौरान नालियाँ ठीक से नहीं बनाई गईं, और जो बनी भी थीं, वे क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। पुलियों में मिट्टी भर जाने से जलभराव की समस्या और बढ़ गई है। “जब से यह निर्माण शुरू हुआ है, हमारा जीना हराम हो गया है। न तो सड़क ठीक बन रही है, न नालियाँ, और न ही कोई हमारी सुनवाई कर रहा है,” एक युवा ने आक्रोश जताया।
स्थानीय लोगों का गुस्सा अब सीमा पार कर चुका है। “सीधी उंगली से घी नहीं निकलता, अब हमें आंदोलन करना पड़ेगा,” एक महिला ने कहा। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो वे बड़े प्रदर्शन पर उतर सकते हैं, जिसका खामियाजा निर्माण कंपनी और प्रशासन को भुगतना पड़ेगा।
मानसून की भारी बारिश ने स्थिति को और भयावह बना दिया है, प्रशासन और निर्माण कंपनी की लापरवाही सवाल खड़े कर रही है। क्या जिला प्रशासन इस मामले में हस्तक्षेप करेगा, या जनता को अपना आक्रोश सड़कों पर उतारना पड़ेगा? देखना होगा कि कब तक टालमटोल की यह नीति चलेगी।
