हिमाचल प्रदेश में छह बार के सीएम वीरभद्र सिंह के तीन वफादार कांग्रेस के तीन वर्किंग प्रेसिडेंट पार्टी से बाहर हो गए हैं। वीरभद्र के निधन के बाद हाईकमान ने 26 अप्रैल 2022 को उनकी धर्मपत्नी प्रतिभा सिंह को प्रदेश अध्यक्ष बनाया और होलीलॉज के चार वफादार हर्ष महाजन, पवन काजल, राजेंद्र राणा और विनय कुमार को वर्किंग प्रेसिडेंट बनाया।
हर्ष महाजन और पवन काजल ने तैनाती के चार-पांच महीने के भीतर ही कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया। अब, राजेंद्र राणा ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। 2 साल के भीतर 3 वर्किंग प्रेसिडेंट कांग्रेस से किनारा कर चुके हैं। और अब बीजेपी की ओर रुख वकांगड़ा से ओबीसी नेता पवन काजल बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़कर विधानसभा पहुंचे हैं। वहीं, हर्ष महाजन भी राज्यसभा सांसद चुने जा चुके हैं।
हर्ष महाजन और काजल लगभग डेढ़ साल पहले झटका दे चुके थे। मगर राणा ने लोकसभा चुनाव से पहले झटका दिया है। इससे सत्तारूढ़ कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। बागी राणा और सुधीर शर्मा की रणनीति से ही कांग्रेस की बहुमत के बावजूद राज्यसभा चुनाव में हार हुई है। अब लोकसभा चुनाव में भी इससे कांग्रेस की स्थिति अच्छी नजर नहीं आ रही।

रजनीकांत प्रशांत किशोर के फॉर्मूले पर तैनात किए थे चार वर्किंग प्रेसिडेंट
कांग्रेस हाईकमान को चार वर्किंग प्रेसिडेंट का फॉर्मूला मशहूर रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने दिया था। फॉर्मूले पर प्रतिभा सिंह को अध्यक्ष और इनके साथ चार वर्किंग प्रेसिडेंट बनाए। उस दौरान कांग्रेस हाईकमान ने कांग्रेस की जंबो कार्यकारिणी बनाई थी।
सुजानपुर से बागी विधायक राजेंद्र राणा के भी अब बीजेपी का दामन थामने की चर्चा हैं। हालांकि, भाजपा में उनकी एंट्री इतनी आसान नहीं है,
क्योंकि राणा ने 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी द्वारा मुख्यमंत्री चेहरा घोषित प्रेम कुमार धूमल को हराकर बड़ा उलटफेर किया था। इसलिए प्रेम कुमार धूमल व उनके बेटे अनुराग ठाकुर के होते हुए भाजपा में उनकी एंट्री इतनी आसान नहीं है।
वर्किंग प्रेसिडेंट की तैनाती के वक्त जातीय व क्षेत्रीय समीकरण का भी ध्यान रखा गया था। एससी कोटे से सिरमौर से विनय कुमार को वर्किंग प्रेसिडेंट बनाया गया, जबकि चंबा से हर्ष महाजन, कांगड़ा से (अन्य पिछड़ा वर्ग) नेता पवन काजल और हमीरपुर से राजेंद्र राणा को वर्किंग प्रेसिडेंट बनाकर क्षेत्रीय संतुलन साधा गया।
