
हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस के बागी विधायकों की हालत कुछ ठीक नहीं दिख रहे हैं । सुप्रीम कोर्ट से सदस्यता बहाल नहीं हुई तो इनकी मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। कांग्रेस से बगावत कर चुके ज्यादातर बागियों के लिए भाजपा के दरवाजे भी बंद नजर आ रहे हैं।
जानकारों की माने तो यदि भाजपा हाईकमान इन बागी विधायकों की पार्टी में एंट्री जबरदस्ती थोपने का प्रयास करता है तो भाजपा को 2022 के विधानसभा चुनाव की तर्ज पर बगावत झेलनी पड़ सकती है। विधानसभा चुनाव में भी बीजेपी के 21 दिग्गजों ने बगावत कर भाजपा का मिशन रिपीट का सपना पूरा नहीं होने सकता है प्रदेश में सभी 68 सीटों पर 40 हजार से भी कम मतों के अंतर से सत्ता भाजपा से दूर हो गई।
लेकिन बीजेपी के दिग्गज नेता इन बागियों को रोकने के लिए जाल बिछाने में जुट गए हैं जन संपर्क अभियान शुरू कर उप चुनाव की तैयारी में डट गए हैं प्रमुख रूप से कुटलैहड़ से दिग्गज नेता एवं पूर्व मंत्री वीरेंद्र कंवर शामिल हैं। वीरेंद्र कंवर ने इलेक्शन कमीशन द्वारा उप चुनाव की घोषणा के साथ फील्ड में जनसंपर्क अभियान तेज कर दिया है। अगर यहां पर कांग्रेस के बागी देवेंद्र कुमार भुट्टो की बीजेपी में एंट्री आसान नहीं है।
वहीं दो बार के मंत्री एवं लाहौल स्पीति से पूर्व विधायक डॉ. रामलाल मारकंडा भी जल्द जनसंपर्क अभियान जल्द ही शुरू करने वाले हैं। धूमल गुट के डॉ. मारकंडा किसी भी सूरत में कांग्रेस के रवि की भाजपा में एंट्री रोकने को तैयार है। वह चुनाव लड़ने के लिए पूरी तरह तैयार है।
राणा के सामने धूमल परिवार की चुनौती
सुजानपुर से कांग्रेस के बागी राजेंद्र राणा को भी भाजपा में जाने की चर्चाएं तेज हो गई है। मगर धूमल परिवार के रहते हुए राणा का बीजेपी की राह में कांटे नजर आ रहे हैं, क्योंकि राणा ने ही 2017 के विधानसभा चुनाव में धूमल को हराया है 2014 का लोकसभा चुनाव राणा ने अनुराग ठाकुर के खिलाफ लड़ा है।