हमीरपुर  में तो एक नारा भी चल रहा है कि देश का वोट पीएम को, प्रदेश का वोट सीएम को

हमीरपुर संसदीय क्षेत्र में कई राजनीतिक दिग्गजों के भविष्य का फैसला जनता करेगी! और दोनों प्रमुख दलों के स्थापित नेताओं की इस चुनाव में कड़ी परीक्षा होगी। कांग्रेस के वर्तमान मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू व उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री भी इसी संसदीय क्षेत्र से आते हैं। वहीं, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर जो भाजपा उम्मीदवार भी हैं की साख भी दांव पर लगी है। अनुराग ठाकुर हालांकि बहुत सशक्त उम्मीदवार हैं,लेकिन कांग्रेस भी यहां उन्हें हराने के लिए कोई भी कसर नहीं छोड़ी रही है

भाजपा ने 2007 में फिर से धूमल को यहां से चुनाव लड़ाया और वो भाजपा के टिकट पर जीत गए। बाद में 2008 में पहली दफा अनुराग ठाकुर ने इस सीट से अपने राजनीतिक कैरियर की शुरूआत की, क्योंकि धूमल के इस्तीफे के बाद यह सीट खाली हो गई थी। 2009 में अनुराग फिर से जीतने में कामयाब रहे। 2014 में अनुराग जीते और संसद पहुंचे। 2014 की मोदी लहर में अनुराग ठाकुर जीत कर पहली दफा कैबिनेट में वित्त राज्य मंत्री बने।

2019 में भाजपा ने फिर से अनुराग ठाकुर को यहां से टिकट दिया। ठाकुर जीत कर केंद्र में कैबिनेट मंत्री बने। उन्हें सूचना व प्रसारण एवं खेल व युवा मंत्रालयों का महत्वपूर्ण कार्यभार मिला। इस बार फिर से चुनाव मैदान में हैं। काफी दिनों से प्रचार भी शुरू कर चुके हैं। वहीं, कांग्रेस ने पहले यहां सतपाल रायजादा को टिकट देने का फैसला लगभग कर ही लिया था, मगर कांग्रेस आलाकमान को उनकी उम्मीदवारी अनुराग के सामने हल्की लगी, जिसके चलते एक बार आस्था अग्निहोत्री के चुनाव लड़ने की भी चर्चा चली, मगर उन्होंने चुनाव लड़ने से मना कर दिया।

राजपूत व ब्राह्मण बाहुल्य की इस सीट पर पूर्व सैनिकों व कर्मचारियों का भी बड़ा वोट बैंक है। हमीरपुर के साथ ऊना, बिलासपुर, कांगड़ा की जसवां परागपुर व देहरा सीट हमीरपुर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है। मंडी जिला की धर्मपुर विधानसभा भी इसी संसदीय क्षेत्र का हिस्सा है। कुल मिलाकर भाजपा इस संसदीय क्षेत्र में हमेशा फ्रंट फुट पर रही है। कांग्रेस ने यहां कई दिग्गज लीडरों को चुनाव लड़ाया, लेकिन सफलता दूर ही रही। अब बड़े जोर-शोर से यहां ऐसे नेता की तलाश की जा रही है, जो अनुराग को न सिर्फ टक्कर दे सके, बल्कि इस सीट को कांग्रेस की झोली में डालकर वर्षों से चले आ रहे जीते के सूखे को खत्म करे।

 

मुख्यमंत्री व उप मुख्यमंत्री का गृह लोकसभा क्षेत्र है लेकिन उन के लिए यहां जीतना व हारना सम्मान से जुड़ा है। लेकिन वहीं भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और अनुराग ठाकुर दोनों की साख भी राष्ट्रीय राजनीति के परिपेक्ष्य में दांव पर है। इस संसदीय क्षेत्र की गगरेट, कुटलैहड़, बड़सर व सुजानपुर विधानसभाओं में कांग्रेस विधायकों के इस्तीफे के चलते विधानसभा उप चुनाव भी होना है। ये भी सांसद उम्मीदवारों के हार-जीत के गणित को प्रभावित करेंगे।

हमीरपुर  में तो एक नारा भी चल रहा है कि देश का वोट पीएम को, प्रदेश का वोट सीएम को । अब देखना है कि कांग्रेस किसे यहां से चुनाव लड़ाती है। ऊना व बिलासपुर जिलों में जो अपने गढ़ को सुरक्षित रख पाएगा, उसे जीत मिल सकती है।

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