हिमाचल प्रदेश के बेरोजगार युवा नौकरी की मांग को लेकर सड़कों पर उतर आए हैं

 

हमीरपुर  के गांधी चौक पर प्रदेश सरकार के खिलाफ मेरे नारे विधानसभा चुनाव में किया नौकरी देने का वादा पूरा करने को प्रदर्शन!

बेरोजगार युवा नई नौकरी निकालने, पुरानी परीक्षाओं के लटके रिजल्ट घोषित करने, आउटसोर्स भर्ती बंद करने, रिटायर अधिकारियों और कर्मचारियों को दोबारा नौकरी देने को लेकर विरोध कर रहे हैं।

बेरोजगार संघ के अध्यक्ष प्रिंस और आशीष ने बताया कि प्रदेश सरकार नई नौकरियां देने के बजाय रिटायर लोगों को दोबारा नौकरी पर रख रही है। सरकार को लगभग 2 साल होने जा रहे है। मगर इस दौरान कमिशन के माध्यम से सिर्फ 1460 लोगों को ही नौकरियां दी गई है।
प्रदर्शन कर रहे एक अन्य बेरोजगार युवा ने बताया कि आउटसोर्स और रिटायर कर्मचारियों का झुंड खड़ा कर दिया है। सरकार जरूरत के हिसाब से आउटसोर्स कर्मचारी रख रही है। नई भर्तियां नहीं होने की वजह से हिमाचल देश में सबसे ज्यादा बेरोजगारी वाला राज्य बनता जा रहा है।
दिसंबर 2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने हिमाचल में सरकार बनने पर 5 साल में 5 लाख नौकरी देने के वादा किया था। सरकार को सत्ता में आए 20 माह बीत हो गए। मगर अब तक नाममात्र बेरोजगारों को ही कमीशन के माध्यम नौकरी दी जा सकी है। हालांकि मुख्यमंत्री 20 हजार से ज्यादा नौकरी देने के दावे कर रहे हैं।
प्रदेश में स्टाफ सिलेक्शन कमीशन भंग होने के कारण नई भर्तियां शुरू नहीं हो पा रही। नया राज्य चयन आयोग पूरी तरह फंक्शनल नहीं हो पाया। इससे कैबिनेट द्वारा मंजूर पद पर भी भर्तियां शुरू नहीं हो पा रही। इससे राज्य के 8 लाख से ज्यादा बेरोजगार युवा परेशान है। इनमें हजारों युवा ऐसे है, जिन्हें ओवर-एज होने का डर सता रहा है।
बेरोजगार युवा आउटसोर्स भर्तियों और रिटायरियों को पुन रोजगार व सेवाविस्तार का विरोध कर रहे है। कांग्रेस जब विपक्ष में थी तो आउटसोर्स भर्ती का निरंतर विरोध करती रही और पक्की नौकरी देने का वादा करके सत्ता में आई। अब खुद आउटसोर्स पर भर्तियां कर रही है।
दिसंबर 2022 में जैसे ही कांग्रेस सत्ता में आई तो स्टाफ सिलेक्शन कमिशन में पेपर लीक फर्जीवाड़ा सामने आया। इसके बाद सरकार ने इसे भंग कर दिया। तब मुख्यमंत्री ने भर्तियों में धांधलियां रोकने के लिए बेरोजगारों से 4 महीने का वक्त मांगा था। मगर नया आयोग अभी भी फंक्शनल नहीं हो सका।

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