जिला हमीरपुर मेडिकल कॉलेज की लापरवाही से दूसरी बार हमारे बच्चे को खा गए मैडीकल कालेज के डॉक्टर नवजात की मौत पर परिजनों ने डॉक्टरों पर लापरवाही के लगाए आरोप कहा डेढ़ साल पहले भी कालेज के डॉक्टर्स की लापरवाही से हुआ था मिसकैरेज

, हमेशा की तरह विवादों से घिरा रहने वाला मेडिकल कॉलेज हमीरपुर फिर विवादों में आ गया है। लोग अब चीख चिल्लाकर कर कहने लगे हैं यह मेडिकल कॉलेज है या तो फिर मौत का अड्डा, दो बार हमारी बेटी के बच्चे को यहां के डॉक्टर खा गए हैं। कॉलेज के डॉक्टरों की लापरवाही के कारण हमारी बेटी का बच्चा संसार नहीं देख पाया। यह संगीन आरोप मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में शुक्रवार शाम को सुजानपुर उपमंडल के तहत री क्षेत्र के लोगों ने उनकी बहु और बेटी द्वारा जन्मे एक नवजात की मौत के बाद डॉक्टरों पर लगाए हैं। शुक्रवार को घटना के बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया। परिजनों ने बच्चे की मौत के लिए मैडीकल कालेज के गायनी विभाग के डॉक्टरों को इसका सीधा कसूरवार ठहराया है। उन्होंने आरोप लगाए हैं कि ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर खुद उनकी बेटी की डिलीवरी करवाने नहीं आए और नए प्रशिक्षु डॉक्टरों को डिलीवरी करवाने भेज दिया। जिससे बच्चे की जान चली गई है। प्रसूती युवती के परिजनों ने यह भी आरोप लगाए कि करीब डेढ़ साल पहले भी इसी कालेज के डॉक्टरों की लापरवाही की वजह से उनकी बेटी का मिसकैरेज हुआ था। मीरा देवी पत्नी अशोक कुमार निवासी टिक्कर डाकघर री तहसील सुजानपुर जिला हमीरपुर ने इस घटना की शिकायत सदर पुलिस को भी की है। शिकायतकर्ता ने बताया कि उसकी बहु शबनम पत्नी विशाल को डिलीवरी के चलते 24 दिसम्बर को भर्ती करवाया गया था। इस दौरान युवती (शबनम) के सभी जरूरी टैस्टों में मां और बच्चे की रिपोर्ट बिल्कुल नार्मल आई थी। 27 दिसम्बर शुक्रवार की भी उनके टैस्ट रिपोर्ट नार्मल बताई गईं, परन्तु उसकी तबीयत अचानक खराब हुई डॉक्टरों और अन्य स्वास्थकर्मियों को इस बारे अवगत भी करवाया गया, परन्तु उन्होंने इसे हल्के में लिया। डिलीवरी के बाद स्वास्थकर्मियों नए उन्हें बताया कि बच्चे की धड़कन बंद है। परिजनों ने आरोप लगाए कि जब सभी रिपोर्टस नार्मल थी तो बच्चे की मौत कैसे हुई। उन्होंने उसकी मौत के लिए तैनात डॉक्टर की और स्वास्थ कर्मियों को कसूरवार ठहराया है। युवती के परिजनों ने मुख्यमंत्री सुखु से दोषी डॉक्टर के विरुद्ध कार्रवाई करने की गुहार लगाई है।

युवती शबनम के पति विशाल, अशोक कुमार, और अन्य परिजनों ने मेडिकल कॉलेज प्रशासन पर बच्चे का पोस्टमार्टम नहीं करने पर भी सवाल खड़े किए हैं
उन्होंने कहा कि शुक्रवार के बाद अगले दिन शनिवार 2:00 बजे तक अभी पोस्टमार्टम नहीं करवाया गया। जिस कॉलेज प्रशासन की प्रणाली सवालों के घेरे में आती है। उन्होंने कहा कि सरकार से न्याय नहीं मिला तो वे कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।

इसके घटना के बारे में बकालेज के प्राचार्य डा रमेश भारती ने बताया कि इस घटना की उन्हें घटना की जानकारी मिली थी। उन्होंने बताया कि डिलीवरी के समय बच्चा रोया नहीं और उसे सांस नहीं आ रही थी। बताया कि कालेज के 4 विभागीय डाक्टरों की टीम के समक्ष पोस्टमार्टम करवाया गया है। छुट्टी होने के चलते पोस्टमार्टम में कुछ देरी हो गई होगी।

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