एन. एच. 03 अनसुलझे सवाल : आखिर क्यों चैक नहीं है रहा एन. एच. 03 राजमार्ग 

एन. एच. 03 राजमार्ग

पर क्या वर्ल्ड बैंक द्वारा की जा रही फंडिग बन रही राजमार्ग की अनदेखी की वजह

क्या कहीं राजनेताओं की द्वेष भावना या किए जा चुके भृष्टाचार की वजह बन रही सभी की चुपी का कारण
हमीरपुर, वर्ष 1999 से स्वीकृत हुए राष्ट्रीय राजमार्ग 03 (वाया टोनी देवी आवाहदेवी) के बनने का इंतज़ार यहां के स्थानीय लोग बड़ी बेसब्री से तो कर रहे थे, परन्तु उन्हें जानकारी नहीं थी कि यह राजमार्ग उनकी शहूलियत कम अपितु उनके लिए अहम परेशानी का सबब बन जाएगा। बर्ष 1999 से लेकर करीब दो दशकों तक यह राजमार्ग मात्र कागजों तक ही सिमित रहा, जब लम्बे अरसे के बाद यह कार्य शुरू हुआ तो निर्माण से काफी पहले ही दुकाने और रिहाईशी मकानो तुड़वाने और बेघर करने का सिलसिला जारी हो गया। निर्माण कार्य शुरू होने के उपरांत करीब 4 साल बाद भी यह निर्माण कार्य कंप्लीट नहीं हो सकता है। ड्रेनेज संबंधी समस्या, बुर्जयों से आगे कटिंग, मुआवजे संबंधी, धूल मिट्टी की समस्या, डंगों की निर्माण गुणवत्ता समेत अन्य कार्य सभी विवादों में रहा है। निर्माण कार्य से प्रभावित हुए लोगों ने मजबूरी में जाकर मीडिया का सहारा लिया और मीडिया ने भी इन समस्याओं को बड़ी गंभीरता से लेते हुए प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किए, किन्तु इसके भी कोई ठोस और सफल परिणाम सामने नहीं आए। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अधिकारी, प्रशासन, नेता, कुछ प्रतिनिधियों, ने प्रभावितों की कोई समस्या गंभीरता से नहीं ली। आखिर इसके पीछे कारण क्या है?
यह कुछ अनसुचे सवाल हैं जो लोगों के लिए जानना बेहद जरूरी है
1 अहम सवाल यह है कि क्या इस राजमार्ग के निर्माण के लिए वर्ल्ड बैंक द्वारा की जा रही फंडिंग लोगों और निर्माणकार्य की अनदेखी की वजह तो नहीं है? सूत्रों के मुताबिक केंद्र सरकार और प्रदेश सरकार द्वारा इसके लिए कोई बजट नहीं जारी किया गया है तो इससे कयास लगाए जा रहे हैं कि कहीं वर्ल्ड बैंक ने तो इस राजमार्ग के लिए फंडिग तो की है परन्तु क्या सरकारों में उच्च पदों पर विराजमान मंत्री और अन्य नेताओं ने इस पैसे को राजमार्ग पर कम बल्कि अपने निजी स्वार्थ और अपनी जेबों को भरने में ज्यादा दिलचस्पी दिखाई है। हो सकता है कि इसी के चलते सभी नेताओं ने चुपी साधी है।
2 सवाल यह भी उठता है कि इस राजमार्ग से लोगों को हो रही परेशानी को मीडिया में रोजाना प्रमुखता से उठाया जा रहा है, फिर भी सरकार के मंत्री और नेता लोगों को राहत पहुंचाने को आगे नहीं आए, लोग कहने में संकोच नहीं कर रहे कि उनकी जेबें गर्म हो चुकी है,
3 हो सकता है कि कुछ नेताओं ने राजनीतीक द्वेष भावना के चलते इस राजमार्ग को विकास की दृष्टि से कम बल्कि लोगो से प्रतिशोध का जरिया बनाया हो।

लोकहित और प्रभावित लोगों से जुड़े इन तमाम सवालों के जबाब तलाशने का हम जी तोड़ प्रयास कर रहे हैं, और इस कडी में हमें कुछ अहम जबाब और जानकारी भी हासिल हुई है। जिसके दस्तावेज और तथ्यों को हम जल्द ही आपके सामने रखेंगे। जो इसमें कसूरवार पाया जाएगा चाहे वह इस राजमार्ग के सर्वे, डी.पी. आर. बनाने, मेडिएटर, अवलोकन करने, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, परदे के पीछे से बैटिंग करने और जेबें भरने में शामिल होगा उस जल्द ही एक्सपोज़ करेंगे

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