देव रथों के आगमन से गाँव रिवाड़ी के प्राचीन ठिरशु मेले का हुआ शुभारम्भ

 (कुल्लू )। क्षेत्र के गाँव रिवाड़ी में दो दिवसीय प्राचीन एवं ऐतिहासिक ठिरशु मेले का बुधवार से शुभारम्भ हो गया है। यहां का सबसे प्राचीन ठिरशु मेला खौधार नामक स्थान पर प्रतिवर्ष जोगेश्वर महादेव की अगुवाई में मनाया जाता है। इस वर्ष ठिरशु मेले में दो रथ विराजमान हुए हैं। जिनमें क्षेत्र के आराध्यदेव दलाश के जोगेश्वर महादेव तथा कुलक्षेत्र महादेव ओलवा ने शिरकत की। दो दिवसीय इस मेले में बुधवार को दोनों रथ सज धज कर बड़े लाव लश्क़र के साथ श्रीराम मंदिर रिवाड़ी में असंख्य लोगों के साथ पहुंचे। देव रथों का गाँव रिवाड़ी, रों, चपोहल, गोहान का 6/20 क्षेत्र के लोगों ने फूल मालाओं से स्वागत किया।

यहां प्राचीन समय से ठिरशु मेले की परम्परा को स्थानीय लोग बड़ी श्रद्धा से निभाते आ रहे हैं। यह मेला वैसाख मास के चार, पाँच प्रविष्टे को मनाया जाता है। बताया जाता है कि यह मेला जोगेश्वर महादेव का जेठा सतराड़ा माना गया है। दूसरा सतराड़ा दलाश के भादों मेले में लगता है। ठिरशु मेले में लगभग पाँच गूर खेल में आते हैं तथा लोगों को सुख शांति का आशीर्वाद देते हैं।

प्राय: इस मेले में 6/20 क्षेत्र की प्राचीन एवं अद्भुत संस्कृति देखने को मिलती है। यूँ तो मेले में दिन में नाटी का दौर तो रहता है परन्तु पुरुष, महिलाएं यहां बिरशु गीत, सीया, देई, दशी, जरमाटली इत्यादि गाते और नाचते हुए अपनी अनोखी परम्परा को निभाते हैं। इस मेले ने सदियों से अपनी परम्परा को कायम रखा है जिसमें लोग आपसी मेल जोल, सदभावना तथा प्रेम भाई चारा का आदान प्रदान करते हैं।

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