शिमला( प्रकाश चन्द शर्मा)हिमाचल प्रदेश के बिजली विभाग के चीफ इंजीनियर विमल नेगी की मौत के मामले में प्रदेश सरकार के अलावा, पुलिस विभाग पर भी सवालिया निशान लग गए हैं. हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में बुधवार को एसपी शिमला और डीजीपी की तरफ से पेश की गई रिपोर्ट के बाद बड़े खुलासे हो रहे हैं. इस मामले में शिमला पुलिस के सदर थाने के एएसआई पंकज की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं. क्योंकि, उन्हें ही ये पेन ड्राइव विमल नेगी के शव के पास मिली थी. इस दौरान उन्होंने किसी से फोन पर भी बातचीत की थी.
दरअसल, मौके पर मौजूद एक मछुआरे ने इसका वीडियो बना लिया था, जिससे यह बातें सामने आई हैं. गौर करने वाली अहम बात यह है कि भी डीजीपी ने अपनी जांच रिपोर्ट में एएसआई पंकज पर गंभीर सवाल उठाए हैं और कहा कि उस पर अपनी सर्विस रिवाल्वर से गोली चलाने का मामला भी दर्ज है और वह विश्वाश के काबिल नहीं हैं.
यही नहीं मामले की स्वतंत्र जांच रिपोर्ट में यह सामने आया है कि मृतक के पास से बरामद की गई एक महत्वपूर्ण पेन ड्राइव को कथित तौर पर फॉर्मेट कर दिया गया था। इस पेन ड्राइव को बाद में “ब्लैंक” (खाली) बताया गया, जबकि इसमें संभावित रूप से संवेदनशील डिजिटल साक्ष्य मौजूद थी. डीजीपी ने यह रिपोर्ट उच्च न्यायालय के आदेशों के अनुपालन में तैयार की है.
रिपोर्ट के अनुसार, आदेश 1 मई 2025 को प्राप्त हुआ और इसके बाद 03 मई व 06 मई को एसपी शिमला को पत्र जारी कर SIT से जुड़ी फाइलें व जांच अधिकारियों को भेजने के निर्देश दिए गए, लेकिन निर्धारित तिथि 07 मई तक कोई उत्तर नहीं मिला. इसके बाद SIT प्रमुख नवदीप सिंह (अतिरिक्त एसपी, शिमला) को 08 मई को तलब किया गया, साथ ही SIT के अन्य सदस्य – शक्ति सिंह (DSP), विक्रम चौहान (DSP), और मनोज कुमार (निरीक्षक) को भी पेश होने के निर्देश दिए गए. इस बीच, DIG साउदर्न रेंज अंजुम आरा की ओरे से भेजे गए एक पत्र में इस बात की पुष्टि हुई कि एसपी शिमला ने “गायब पेन ड्राइव” से संबंधित कोई ठोस जानकारी नहीं दी. जैसा कि विमल नेगी की पत्नी किरण नेगी ने अखबार के माध्यम से आरोप लगाया था.
एसपी शिमला ने इसके बाद 08 मई को SFSL जुंगा को निर्देशित किया कि किसी भी फोरेंसिक रिपोर्ट को केवल जांच अधिकारी को ही सौंपा जाए, DGP को नहीं. उन्होंने खुद यह भी लिखा कि रिपोर्ट पहले ही डीआईजी के माध्यम से दी जा चुकी है. हालांकि, रिपोर्टिंग अधिकारी का मानना है कि जब तक केस डायरी, केस फाइलें व अन्य दस्तावेजों की स्वतंत्र जांच न हो, तब तक “स्वतंत्र रिपोर्ट” संभव नहीं. जब SFSL से रिपोर्ट मंगवाई गई, तो पता चला कि केवल 4 डॉकेट की जांच हुई थी और शेष अब भी लंबित हैं. इनमें से डॉकेट नंबर 1 में पेन ड्राइव को लेकर चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है.
यह बात पता चली है कि “डिवाइस 21 मार्च 2025 को फॉर्मेट की गई थी जांच में इसे ब्लैंक पेन ड्राइव बताया गया. यह वही पेन ड्राइव है जो विमल नेगी के शव से बरामद हुई थी. रिपोर्ट में कहा गया है कि FTK इमेजर और अन्य फोरेंसिक टूल्स से कुछ डेटा दोबारा किया गया, जिसमें लगभग 4000 से अधिक फाइलें थीं. हालांकि, सीमित समय के कारण सभी का विश्लेषण नहीं किया जा सका. जो फाइलें जांची गईं, उनमें कोई सुसाइड नोट नहीं मिला और अधिकतर दस्तावेज व्यक्तिगत या परियोजनाओं से संबंधित पाए गए, जैसे – शोंगटोंग, करचम, ऊना और पेखुबेळ्ला प्रोजेक्ट्स. इनमें से कुछ पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन थे।