पवन धीमान, हमीरपुर
विकास के नाम पर प्रकृति का निर्मम दोहन जारी है। चील बाहल से कोहली तक निर्माणाधीन शिमला-मतौर फोरलेन डबल लेन परियोजना में कंपनी की लापरवाही से पहाड़ों का सीना छलनी हो रहा है। मस्याना चौक से लगभग 3 किलोमीटर तक पहाड़ी को बेरहमी से काटा गया है, जिससे पत्थर और पेड़ लगातार गिर रहे हैं। अंधाधुंध कटाई के कारण मस्याना चौक पर कृत्रिम झील बन गई है, जो किसी भी समय बड़े हादसे को जन्म दे सकती है।
*ब्लास्टिंग और मूसलाधार बारिश ने बढ़ाई मुसीबत*
हैरानी की बात यह है कि कंपनी लगातार ब्लास्टिंग कर रही थी, जबकि पूरे हिमाचल में मूसलाधार बारिश से त्रासदी का माहौल बना हुआ है। जब वन विभाग की टीम निरीक्षण के लिए पहुंची, तो उसने निर्माण कार्य रोक दिया। एसीएफ वन विभाग ने बताया कि कंपनी ने पहाड़ की कटाई सही तरीके से नहीं की, जिससे कई स्थानों पर मलबे के साथ पेड़ गिर गए हैं। यहां पहले भी डैमेज रिपोर्ट दर्ज की जा चुकी है। कुनाह खड में मलबे का ढेर साफ दिखाई दे रहा है, जिसके नीचे सैकड़ों पेड़ दबे हुए हैं।
स्थानीय व्यापारी ओम कुमार ने बताया कि मस्याना से खगल तक सड़क की हालत बेहद खराब है। कंपनी अपनी भारी मशीनों और वाहनों को इसी मार्ग से ले जाती है, लेकिन रखरखाव पर ध्यान नहीं देती। यह मार्ग मस्याना को पक्का भरो, झन्यारी देवी, जोलसप्पड़ और कांगू से जोड़ता है। कुछ दिन पहले इसी रास्ते पर एक स्कूल बस अनियंत्रित हो गई थी, जिसमें बाल-बाल बचाव हुआ।
*दुकानदारों पर मलबे का कहर, प्रशासन मौन*
मस्याना के व्यापारी मदन लाल ने बताया कि बारिश में फोरलेन का मलबा सीधा उनकी दुकानों को नुकसान पहुंचा रहा है। स्थानीय लोगों ने कई बार हेल्पलाइन 1100 पर शिकायत दर्ज कराई, लेकिन कोई सुधार नहीं हुआ। कंपनी ने दो साल में मात्र एक पानी के टैंकर से छिड़काव किया है, जिससे धूल और मलबे का प्रकोप बढ़ गया है। व्यापारियों को कुछ समय के लिए दुकानें बंद करनी पड़ीं। अब स्थानीय लोगों ने मांग की है कि कृत्रिम झील का पानी तुरंत निकाला जाए, नहीं तो डेंगू-मलेरिया जैसी बीमारियां फैल सकती हैं।
*वन विभाग ने काटी 1 लाख से अधिक की डैमेज रिपोर्ट*
इस पूरे विषय पर वन मंडलाधिकारी अंकित शर्मा ने बताया कि अब तक 1 लाख से अधिक की डैमेज रिपोर्ट काटी जा चुकी है। कोहली से चील बाहल तक निरीक्षण के आदेश दिए गए हैं कि कितने पेड़ बिना अनुमति के काटे गए। सवाल यह भी उठ रहा है कि राष्ट्रीय हाईवे प्राधिकरण ग्रीन हाईवे का दावा करता है, लेकिन खुद ही हजारों हरे-भरे पेड़ों को काट रहा है। यह कहां का ग्रीन हाईवे है?
प्रशासन से मांग की जा रही है कि इस मामले की उच्चस्तरीय जांच हो और दोषियों को कड़ी सजा दी जाए। विकास के नाम पर प्रकृति का विनाश बर्दाश्त नहीं किया जाएगा!
