पवन धीमान, हमीरपुर
जिले में तीन विधानसभाओं से गुजरने वाले निर्माणाधीन राष्ट्रीय राजमार्गों की दुर्दशा ने आम जनता की परेशानियों का पहाड़ खड़ा कर दिया है। एक ओर जहाँ एक कंपनी घटिया काम और गायब अधिकारियों के कारण चर्चा में है, वहीं दूसरी कंपनी मानसून को अपनी कमियों का ढाल बना रही है। इस पूरे मामले में प्रशासनिक और ठेकेदारी लापरवाही साफ झलक रही है।
*सूर्य कंपनी का 23 KM लंबा ‘खोखला’ सपना*
हमीरपुर से आवाहदेवी तक बनने वाले 23 किलोमीटर लंबे राजमार्ग की हालत इतनी दयनीय है कि इसकी गूंज दिल्ली तक पहुँच चुकी है। सूर्य कंपनी द्वारा निर्मित इस सड़क की गुणवत्ता शून्य के बराबर बताई जा रही है। आए दिन होने वाले विवादों के बावजूद केंद्र सरकार तक इसकी आवाज पहुँचने के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हुई है। स्थिति यह है कि जिले के विधायकों ने भी हार मान ली है।
कंपनी की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। माना जा रहा है कि कंपनी के पास न तो पर्याप्त मशीनें हैं और न ही कर्मचारी। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कंपनी के कर्मचारी लाखों रुपए उधार लेकर फरार हो चुके हैं। कंपनी के अधिकारी जनता और मीडिया से सीधे बातचीत से कतराते हैं। उनसे संपर्क करने के सभी प्रयास नाकाम हो रहे हैं, ऑफिस जाने पर बस एक ही जवाब मिलता है कि “सर फील्ड में गए हैं”।
23 किलोमीटर का यह सफर अब खड्डों और तालाबों में तब्दील हो चुका है। हमीरपुर से धर्मपुर तक के लोगों ने हद भर जाने पर सूर्य कंपनी के खिलाफ चक्का जाम और ‘मुर्दाबाद’ के नारे तक लगाए, लेकिन कंपनी के कान पर जूं तक नहीं रेंगी। कंपनी का बचाव यह है कि लोग जमीन नहीं दे रहे, लेकिन सवाल यह है कि सर्वे के वक्त जमीन का मापन और मुआवजा वितरण कैसे हुआ?
*झंडू कंस्ट्रक्शन: 400 करोड़ के प्रोजेक्ट में मानसून का बहाना?*
दूसरी ओर, झंडू कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड कंपनी चिलवाहाल से कोहली तक 17 किलोमीटर का रोड बना रही है। यह 400 करोड़ रुपए का प्रोजेक्ट है, जिसमें 60% हिस्सेदारी केंद्र सरकार की है।
कंपनी के प्रोजेक्ट डायरेक्टर जहांगीर हसन का कहना है कि इस मानसून में भूस्खलन से उन्हें नुकसान भी हुआ और फायदा भी। उनका दावा है कि इससे उन्हें पता चल गया कि जमीन कहाँ-कहाँ धंस रही है, जिसे भविष्य में ठीक किया जाएगा। उन्होंने बताया कि अब तक 70-80% काम पूरा हो चुका है और 6 पुलों में से 3 का निर्माण पूरा हो गया है।
हालाँकि, 17 किलोमीटर का सफर आसान होगा या नहीं, इस पर कंपनी ने स्पष्ट जवाब देने से इनकार कर दिया है। प्रोजेक्ट डायरेक्टर का कहना है कि काम पूरा होने से पहले कुछ कहना मुश्किल है। कंपनी ने स्थानीय लोगों को रोजगार देने का दावा करते हुए बताया कि उनके 120 कर्मचारियों में से 40-50 स्थानीय हैं।
स्पष्ट है कि हमीरपुर के इन राष्ट्रीय राजमार्गों का भविष्य अभी अनिश्चितता के घेरे में है। एक तरफ सूर्य कंपनी की लापरवाही और पारदर्शिता की कमी है, तो दूसरी तरफ झंडू कंस्ट्रक्शन की ‘इंतज़ार की नीति’ है। ऐसे में, जनता की उम्मीदें अब प्रशासन और सरकार के हस्तक्षेप पर टिकी हैं, ताकि उन्हें गुणवत्तापूर्ण सड़कें मिल सकें और उनका करदाताओं का पैसा सही जगह खर्च हो।
